TCS Share Price: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) पर ट्रेड-सीक्रेट उल्लंघन मामले में कानूनी दबाव और बढ़ गया है, क्योंकि United States Court of Appeals ने अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कंपनी पर लगाए गए $194 मिलियन यानी करीब ₹1,738 करोड़ के हर्जाने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला 21 नवंबर 2025 की अमेरिकी शाम को आया, जिसने निवेशकों के बीच TCS की कानूनी स्थिति को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि कंपनी कह रही है कि वह इस फैसले की समीक्षा कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार करेगी।
TCS बनाम DXC Technology मामला
इस विवाद की जड़ 2019 में है जब CSC (जो बाद में DXC Technology बना) ने TCS पर आरोप लगाया कि उसने उनके मालिकाना सॉफ्टवेयर Vantage-One और CyberLife का गलत उपयोग किया। CSC का कहना था कि 2018 में Transamerica Life Insurance के 2,200 कर्मचारियों को भर्ती करने के बाद TCS के पास वह तकनीकी जानकारी पहुंची, जिसका उपयोग उसने अपने नए इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म के विकास में किया। TCS ने सभी आरोपों से इनकार किया और मामले को चुनौती दी, लेकिन 2024 में US District Court ने कंपनी पर $194 मिलियन का हर्जाना लगाने का आदेश दिया।
TCS Share Price Legal Impact
Court of Appeals ने निचली अदालत की नुकसान राशि को बरकरार रखा है। हालांकि राहत यह है कि पहले जारी किया गया injunction ऑर्डर रद्द कर दिया गया है और इसे दुबारा आकलन के लिए टेक्सास डिस्ट्रिक्ट कोर्ट भेज दिया गया है। इसका मतलब है कि TCS पर तत्काल परिचालन प्रतिबंध लागू नहीं होगा। कंपनी ने कहा है कि वह अपनी स्थिति का मजबूती से बचाव करेगी और आवश्यक कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।
TCS History
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि वह कानूनी फैसले का अध्ययन कर आगे की रणनीति तय करेगी। यह पहला मौका नहीं है जब TCS ऐसे विवाद का सामना कर रही है। इससे पहले Epic Systems केस में भी कंपनी पर ₹1,166 करोड़ का हर्जाना लगा था। यह दिखाता है कि ट्रेड-सीक्रेट मुकदमों में कंपनी की चुनौती लंबी अवधि तक चल सकती है।
DXC Technology कैसे बनी
DXC की स्थापना 2017 में CSC और Hewlett Packard Enterprise की Enterprise Services यूनिट के विलय से हुई थी। CSC ने ही 2019 में मूल शिकायत दर्ज की थी। DXC का तर्क था कि उसके मालिकाना सॉफ्टवेयर की तकनीक का उपयोग TCS ने बिना अनुमति किया, जिससे यह मुकदमा कई सालों तक अदालतों में चलता रहा।
TCS Q2FY26 Results
कानूनी जोखिमों के बीच TCS का Q2FY26 प्रदर्शन स्थिर रहा और कंपनी ने ₹65,799 करोड़ की आय दर्ज की, जो पिछली तिमाही से 3.7 प्रतिशत अधिक है। कांस्टेंट करंसी आधार पर वृद्धि 0.8 प्रतिशत रही। नेट प्रॉफिट ₹12,075 करोड़ रहा, जिसमें ₹1,135 करोड़ का एकमुश्त रीस्ट्रक्चरिंग खर्च शामिल था। इसे हटाने पर शुद्ध लाभ 8.36 प्रतिशत की साल-दर-साल वृद्धि दिखाता है। ऑपरेटिंग मार्जिन 25.2 प्रतिशत तक बढ़ा और नेट मार्जिन 19.6 प्रतिशत पर स्थिर रहा, जो अंतरराष्ट्रीय बिजनेस की मजबूती को दर्शाता है।
TCS Financial Highlights (Q2FY26)
| पैरामीटर | मूल्य |
|---|---|
| कुल आय | ₹65,799 करोड़ |
| सीक्वेंशियल ग्रोथ | 3.7% |
| नेट प्रॉफिट | ₹12,075 करोड़ |
| रीस्ट्रक्चरिंग खर्च | ₹1,135 करोड़ |
| मार्जिन | 25.2% |
| नेट मार्जिन | 19.6% |
कानूनी और वित्तीय जोखिम
एक पैराग्राफ़ में महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:
- $194 मिलियन हर्जाना TCS पर तत्काल वित्तीय दबाव पैदा करता है
- injunction रद्द होने से परिचालन पर कोई रोक नहीं
- कंपनी भविष्य में उच्च कानूनी खर्च वहन कर सकती है
- Q2FY26 प्रदर्शन स्थिर, मार्जिन मजबूत
- आगे की कानूनी रणनीति पर निवेशकों की नजर रहेगी.
निष्कर्ष
TCS Share Price पर कानूनी जोखिम अल्पकालिक दबाव जरूर ला सकता है, लेकिन कंपनी के मजबूत फंडामेंटल, लगातार बढ़ती आय, स्थिर मार्जिन और वैश्विक प्रोजेक्ट्स इसे लंबी अवधि में मजबूत बनाए हुए हैं। DXC Technology केस का नतीजा कंपनी के खर्च और सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकता है, लेकिन परिचालन और बिजनेस मॉडल पर इसका कोई तत्काल नकारात्मक प्रभाव नहीं दिख रहा। इसलिए TCS के लिए आने वाले महीनों में कानूनी मोर्चे की स्थिति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है।



